लोक सभा चुनाव 2019: राम टहल चौधरी की बीजेपी को चेतावनी

लोक सभा चुनाव 2019: राम टहल चौधरी की बीजेपी को चेतावनी

रांची, मार्च 24: 2019 के आगामी लोक सभा चुनावों की हलचल शुरू हो गयी है । पार्टी बदलने, धमकी देने, और ब्लैकमेल करने की घटनाएं आम हो गयी हैं । एक बार चुनाव क्या जीत गए कई नेता यह समझ बैठे हैं कि लोक सभा सीटों पर उनकी रजिस्ट्री हो गयी है !

अब इन बातों से बीजेपी जैसी कैडर आधारित और अनुशासित पार्टियाँ भी अछूती नहीं रहीं ! अभी तक साक्षी महाराज की चेतावनी को लोग भूले नहीं थे कि पार्टी के वरिष्ठ एवं तपे-तपाये नेता राम टहल चौधरी के वक्तव्यों से  ऐसा लगता है कि उन्होंने पार्टी के खिलाफ अपना अलग ही मोर्चा खोल दिया हो।

ये नेता आखिर ये क्यों भूल जाते हैं कि अब वह वर्त्तमान राजनैतिक परिवेश में फिट नहीं बैठ रहे । उम्र बढ़ने के साथ उनके काम करने की शक्ति भी क्षीण होने लगती है । उदाहरण के तौर पर श्री लाल कृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, हुकुमदेव नारायण यादव, या कड़िया मुंडा जैसे पार्टी के संस्थापक नेताओं ने भी कोई प्रश्न खड़े नहीं किये क्योंकि उन्हें पता है कि यह एक प्रक्रिया है जिसका पालन अनिवार्य है ।

गांधीनगर लोक सभा सीट पर लाल कृष्ण आडवाणी की जगह अब अमित शाह को दे दी गयी है ।

पार्टी कोई भी हो, अगर आप चुनाव जीतते हैं तो उसमें संगठन की काफी अहम भूमिका होती है । टिकट कटने पर पार्टी को नुक्सान पहुंचाने की प्रकृति स्वस्थ लोकतंत्र के लिए निश्चित रूप में घातक है ।

यह सत्य है कि जिस ढंग से मतदाता बंधुआ नहीं है उसी प्रकार से नेता भी बंधुआ नहीं हो सकता है । लेकिन टिकट न मिलने पर पार्टी छोड़ने की बात या अपनी पार्टी को नुक्सान पहुँचाने की बात करना कहाँ तक उचित है?

ये तो रही सियासत की बात, लेकिन आम आदमी के जीवन में भी नौकरी से हटा दिए जाने या छोड़ने पर नियोक्ता की शिकायत करना भी उचित बात नहीं मानी जाती!

 

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